Old Pension Scheme Update 2026: पुरानी पेंशन योजना यानी Old Pension Scheme (OPS) भारत में सरकारी कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद वित्तीय सुरक्षा देने वाली एक महत्वपूर्ण व्यवस्था रही है। इस योजना के तहत कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के बाद अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत हिस्सा पेंशन के रूप में मिलता है, जो जीवनभर जारी रहता है। वर्ष 2004 से पहले सरकारी सेवा में शामिल हुए कर्मचारी आज भी इसी योजना के तहत लाभ पा रहे हैं। लेकिन 1 जनवरी 2004 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली यानी NPS के तहत रखा गया, जिससे कर्मचारी संगठनों में असंतोष की लहर फैल गई और OPS की मांग एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुकी है।
केंद्र सरकार का रुख — OPS नहीं, UPS लाई गई
2026 में सोशल मीडिया और कुछ वेबसाइटों पर यह खबरें तेजी से फैलीं कि केंद्र सरकार ने OPS को फिर से लागू कर दिया है। लेकिन यह दावा पूरी तरह सच नहीं है। मार्च 2026 तक केंद्र सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है कि NPS या UPS के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए OPS को वापस लाने की कोई योजना नहीं है। इसके बजाय केंद्र ने Unified Pension Scheme (UPS) की शुरुआत की है, जो NPS और OPS दोनों की कुछ विशेषताओं को मिलाकर बनाई गई है। UPS में 25 वर्ष की सेवा पूरी करने पर लगभग 50 प्रतिशत सुनिश्चित पेंशन देने का प्रावधान है, जिससे यह योजना आर्थिक दृष्टि से टिकाऊ बनी रहे।
राज्य स्तर पर OPS की वापसी — कहाँ-कहाँ हुआ लागू
भले ही केंद्र सरकार OPS की पुनर्बहाली से पीछे हट रही हो, लेकिन कई राज्य सरकारें अपने कर्मचारियों के दबाव और राजनीतिक कारणों के चलते OPS को लागू कर चुकी हैं। राजस्थान, पंजाब, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों ने अपने राज्य कर्मचारियों के लिए OPS को बहाल कर दिया है। इन राज्यों में NPS के तहत जमा हुए कर्मचारियों के अंशदान को ब्याज सहित वापस करने और पुरानी प्रणाली के अनुसार पेंशन लागू करने की प्रक्रिया चल रही है। मार्च 2026 तक देश में OPS की कोई सार्वभौमिक बहाली नहीं हुई है और अलग-अलग राज्य अपनी-अपनी पेंशन नीतियों के आधार पर काम कर रहे हैं।
OPS के फायदे जो कर्मचारियों को आकर्षित करते हैं
पुरानी पेंशन योजना की लोकप्रियता के पीछे कई ठोस कारण हैं। OPS के तहत कर्मचारी को अंतिम वेतन के 50 प्रतिशत के बराबर पेंशन मिलती है, इसमें कर्मचारी का कोई अंशदान नहीं होता, जिससे मासिक वेतन में कोई कटौती नहीं होती। इसके अलावा महंगाई राहत (Dearness Relief) साल में दो बार स्वतः बढ़ाई जाती है, जिससे पेंशन की क्रय शक्ति बनी रहती है, और परिवार को कर्मचारी की मृत्यु के बाद 60 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन का भी प्रावधान होता है। NPS में पेंशन की राशि बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती है, जबकि OPS में यह पूरी तरह सुनिश्चित होती है। यही वजह है कि लाखों कर्मचारी OPS की वापसी के लिए आवाज उठाते आए हैं।
आर्थिक चुनौती — सरकार की मजबूरी क्या है
OPS के फायदों के बावजूद इसे वापस लाना सरकार के लिए आसान नहीं है। केंद्र सरकार का पेंशन खर्च 1990-91 में 2,138 करोड़ रुपये था, जो 2020-21 तक बढ़कर 1,90,886 करोड़ रुपये हो गया — यानी तीन दशकों में लगभग 58 गुना वृद्धि।OPS के तहत सरकार बिना किसी पूर्व-निर्मित कोष के दशकों तक पेंशन देने की प्रतिबद्धता लेती है, जिसे अर्थशास्त्री “unfunded liabilities” कहते हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ और वित्त मंत्रालय दोनों OPS की व्यापक बहाली को लेकर सतर्क रवैया अपना रहे हैं।
कर्मचारियों को क्या करना चाहिए — सही जानकारी का महत्व
सोशल मीडिया पर OPS को लेकर तरह-तरह की अफवाहें और भ्रामक खबरें फैल रही हैं, जिनसे कर्मचारी भ्रमित हो सकते हैं। भारत में किसी भी बड़े नीतिगत बदलाव के लिए कैबिनेट की मंजूरी, आधिकारिक सर्कुलर और राजपत्र अधिसूचना जरूरी होती है। इसलिए कर्मचारियों को चाहिए कि वे केवल सरकारी वेबसाइट, विभागीय नोटिफिकेशन और आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ही जानकारी प्राप्त करें। किसी भी नीतिगत बदलाव की पात्रता केवल आधिकारिक सरकारी आदेश से ही तय होती है, न कि सार्वजनिक चर्चाओं या मीडिया रिपोर्टों से।
भविष्य में पेंशन प्रणाली की दिशा क्या हो सकती है
OPS बनाम NPS की बहस आने वाले वर्षों में और तेज होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार एक संतुलित मॉडल की ओर बढ़ सकती है, जिसमें कर्मचारियों को न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन मिले और सरकारी खजाने पर अत्यधिक बोझ भी न पड़े। अचानक राष्ट्रव्यापी बदलाव की बजाय विशेषज्ञ क्रमिक सुधार या हाइब्रिड पेंशन मॉडल को अधिक व्यावहारिक मानते हैं। आठवें वेतन आयोग की चर्चाओं के बीच पेंशन सुधार का मुद्दा नीति-निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता बना हुआ है और आने वाले वर्षों में इसमें नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। पेंशन नियम, पात्रता और योजनाओं की स्थिति सरकारी अधिसूचनाओं के अनुसार बदलती रहती है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी वित्तीय या सेवा संबंधी निर्णय लेने से पहले अपने विभाग की आधिकारिक अधिसूचना, DoPT पोर्टल या राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट से जानकारी अवश्य सत्यापित करें।









