Major Relief for Railway Employees: भारतीय रेलवे में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए रेलवे बोर्ड ने एक बड़ी राहत भरी घोषणा की है। स्थानांतरण यानी ट्रांसफर या प्रतिनियुक्ति यानी डेप्युटेशन की स्थिति में अब कर्मचारी अपने बच्चों की शिक्षा को आधार बनाकर पहले से अधिक समय तक सरकारी आवास को अपने पास बनाए रख सकेंगे। यह बदलाव उन हजारों रेलवे परिवारों के लिए बेहद जरूरी था, जो ट्रांसफर के वक्त बच्चों की पढ़ाई को लेकर गहरी चिंता में पड़ जाते थे। रेलवे बोर्ड ने यह फैसला जनहित में और कर्मचारियों की व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए लिया है।
कक्षा एक से आठ के बच्चों के लिए क्या बदला
पहले के नियमों के मुताबिक यदि स्थानांतरण के समय बच्चा कक्षा एक से आठ में पढ़ रहा था, तो शैक्षणिक सत्र समाप्त होने के बाद केवल 15 दिनों तक ही सामान्य लाइसेंस शुल्क पर सरकारी आवास रखने की अनुमति थी। अब नए नियम के तहत इसे बढ़ाकर एक पूरे महीने तक कर दिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब परिवार के पास नया घर ढूंढने, बच्चे का नए स्कूल में दाखिला कराने और शिफ्टिंग की व्यवस्था करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। यह छोटा सा बदलाव व्यवहार में बहुत बड़ी राहत लेकर आया है, क्योंकि 15 दिनों में यह सारी प्रक्रिया पूरी करना बहुत मुश्किल होता था।
बोर्ड परीक्षा देने वाले बच्चों को मिली बड़ी सहूलियत
जिन कर्मचारियों के बच्चे बोर्ड परीक्षा यानी दसवीं या बारहवीं की परीक्षा दे रहे हों, उनके लिए यह राहत और भी अधिक महत्वपूर्ण है। नए नियमों के अनुसार अब बोर्ड परीक्षा का अंतिम पेपर समाप्त होने के बाद तीन महीने तक सामान्य शुल्क पर सरकारी आवास रखने की सुविधा दी गई है। पहले बोर्ड परीक्षा के मामले में भी केवल 15 दिन की अनुमति थी, जो परीक्षा देने वाले छात्रों और उनके परिवारों के लिए बड़ी समस्या बनती थी। यह विस्तारित अवधि बोर्ड परीक्षार्थियों को मानसिक शांति के साथ परीक्षा देने का मौका देगी।
कब और कैसे लागू हुआ यह आदेश
रेलवे बोर्ड ने यह आदेश 23 मार्च 2026 को जारी किया, जो RBE No. 26/2026 के रूप में दर्ज है। रेलवे बोर्ड की सामान्य पथ निदेशक नीलम यादव के हस्ताक्षर से यह पत्र सभी जोनल रेलवे को भेजा गया है। यह निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और इसका पालन सभी रेलवे प्रशासनों को करना होगा। बढ़ी हुई पूरी अवधि के दौरान कर्मचारी से सामान्य लाइसेंस शुल्क ही वसूला जाएगा, कोई अतिरिक्त या दोगुना शुल्क नहीं लगेगा, जिससे आर्थिक बोझ भी नहीं बढ़ेगा।
रेलवे परिवारों के लिए क्यों जरूरी था यह बदलाव
रेलवे एक ऐसा विभाग है जहाँ कर्मचारियों का बार-बार और अचानक तबादला होता रहता है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित होती थी, क्योंकि परीक्षाएं बीच में छूट जाती थीं और परिवार को जल्दबाजी में मकान खाली करना पड़ता था। नए नियमों से अब परिवारों को यह सुविधा मिलेगी कि बच्चा अपना शैक्षणिक सत्र या बोर्ड परीक्षा उसी स्कूल से पूरी कर सके, जहाँ वह पहले से पढ़ रहा है। यह कदम बच्चों की शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करने की दिशा में रेलवे बोर्ड का एक संवेदनशील और सराहनीय निर्णय है।
अस्वीकरण: यह आर्टिकल रेलवे बोर्ड के सार्वजनिक आदेश RBE No. 26/2026 पर आधारित सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। आवास संबंधी किसी भी नियम की आधिकारिक और विस्तृत जानकारी के लिए कृपया अपने संबंधित रेलवे विभाग या भारतीय रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट indianrailways.gov.in पर जाएं।









